Republic Day 2017 Speech

गणतंत्र दिवस - 26 जनवरी 2017 के अवसर पर

माननीया डॉ. (श्रीमती) मृदुला सिन्हा, राज्यपाल, गोवा का संदेश

मेरे प्रिय गोवावासियों,

आज हम सब पावन गणतंत्र दिवस को बड़े उत्साह एवं हर्षोल्लास के साथ मना रहे हैं। इस सुअवसर पर मैं गोवावासियों को अपनी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देती हूँ। यह एक ऐसा अवसर है जो हमारे दिलों दिमाग को स्वतंत्र भारत में आने वाले विकास से जुडे अनेकों प्रश्नों से भर देता है। साथ ही यह एक ऐसा दिन है, जो हमें राष्ट्र के भविष्य के लिए प्रतिबद्ध होने के लिए अवसर प्रदान करता है ।

मित्रों,

जैसा कि हम सब जानते हैं, आज ही के दिन सन् 1950 में आजाद भारत ने एक नया संविधान अपनाकर स्वयं को एक धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी और लोकतंत्र के रूप में स्थापित किया। सदियों से गुलाम राष्ट्र में एक स्थिर लोकतंत्र बनाने के लिए यह एक महत्त्वपूर्ण कदम था। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी की दूरदृष्टि और नेतृत्व में, अनेकानेक संघर्ष और बलिदान से ही भारत को अपनी खोई हुई आजादी एवं विश्व में सम्मान प्राप्त हुआ। और इसी सियासी स्वतंत्रता की बागडोर पकड़कर आज हमारा आजाद भारत, अपने नागरिकों की प्रतिभा के अनुसार एक नए विकासशील युग की ओर चल पड़ा है। सभी स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रीय नेताओं के अद्भुद त्याग और संघर्ष की स्मृतियों को हम संजोकर रखना चाहते हैं। आइये, आज हम सभी गोवावासी मिलकर सभी राष्ट्रीय नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों, जो हमारे लोकतंत्र को संभालने के लिए बिना थके, बिना रुके चलते रहे, उनके अद्भुद साहस को श्रद्धांजलि अर्पित करें।

मित्रों,

1950 में आज ही के दिन अपनाया गया संविधान, भावी आकाँक्षाओं और आशाओं को दर्शाता है। और साथ ही मैं आप लोगों को याद दिलाना चाहूंगी कि संविधान न केवल आपको आपके मौलिक अधिकार प्रदान करता है, बल्कि आपकी मौलिक जिम्मेदारियों और कर्तव्यों की भी आशा रखता है। जितना महत्त्वपूर्ण अपने अधिकारों की रक्षा करना है, उतना ही महत्त्वपूर्ण है प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों को समझकर उनका पालन भी करे। तभी हमारा राष्ट्र उन्नत होगा और सामाजिक व आर्थिक बदलाव संभव हो पाएगा। मैं अधिकार प्राप्ति के लिए नागरिकों को एक सूत्र देते आई हूँ - ‘‘कत्र्तव्य की लागत लगाकर अधिकार अर्जित करें।’’

देवियों और सज्जनों,

यह बात हमारे लिए अत्यधिक संतोषजनक है कि 66 सालों में हमारा राष्ट्र एक सशक्त राष्ट्र के रूप में स्थापित हो चुका है। आज सबसे शक्तिशाली देशों के साथ बराबरी के स्तर पर है। औपनिवेशिक शासन ने हमारे देश को गरीबी, अशिक्षा, कमजोर सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था, उपयोग की सामग्रियों की कमी जैसी अनेक समस्याओं से जकड़ दिया था। हमारे राष्ट्र के लिए पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम था आधारभूत संरचना क्षेत्र और कृषि को बढ़ावा देना। क्योंकि कृषि ही हमारी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार रहा है। अनेक संकटों और अभावों का सामना करते हुए हमारे देश ने इतनी शक्ति एकत्रित कर ली है कि यह अपने वर्तमान की समस्याओं का समाधान ढूँढ़ते हुए भविष्य के सुनहरे सपने देख सके। इसी एकत्रित शक्ति से हमारा देश आंतरिक और सीमा पार से आने वाली हर समस्या का बहादुरी से सामना करने में सक्षम है। यह शक्ति भारत के समृद्ध सांस्कृतिक, दार्शनिक और नैतिक विरासत का ही परिणाम है। दशकों से राष्ट्रीय विकास नीतियों के पालन में अकूत धन लगाए जा चुके हैं, फिर भी हम इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकते कि तमाम उपलब्धियों के बाद भी लाखों गरीब, अशिक्षित, बीमार और अनेक समस्याओं से ग्रस्त लोग इस विकास की राह पर भागीदार नहीं हो पाए।

मैं आप सभी को याद दिलाना चाहूंगी कि गणतंत्रत दिवस मात्र एक आनंदोत्सव का अवसर नहीं है, बल्कि यह दिन अतीत के मूल्यांकन और भविष्य के लिए प्रतिबद्ध होने का है। हमे पुनः अपने आपको राष्ट्र की एकता और समृद्धि के लिए पूर्ण रूप से समर्पित करना चाहिए। गण और तंत्र दोनों भिन्न और अभिन्न भी हैं। इन दोनों को एक-दूसरे पर हावी नहीं होना है। गण पर तंत्र को कदापि नहीं।

मित्रों ,

आज हम जिस जनतंत्र प्रणाली में रह रहे हैं, अपने आसपास रह रहे लोगों के लिए कितना कुछ करना बाकी है। हमें चाहिए कि संविधान में बताए गए सिद्धान्तों और आकांक्षाओं को समझकर पुनः अमल में लाएं और सभी नागरिकों में एकता का भाव जागृत करें। यह याद दिलाना मैं अनावश्यक समझूँगीं कि सभी लोग इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि लोकतंत्र की जड़ों को भारत की भूमि पर और भी ज्यादा मजबूत करने के लिए हमे स्वयं संयम, सहनशीलता और एक राष्ट्रीय दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।

देवियों और सज्जनों,

यह सच है कि हर भारतीय स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा होगा कि इन छियासठ सालों में भारत ने हर क्षेत्र में अद्भुद उन्नति प्राप्त की है । विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में उन्नति संपूर्ण राष्ट्र के लिए गौरव की बात है। शिक्षा के क्षेत्र में भी असाधारण उपलब्धियां प्राप्त की हैं। देश में विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, चिकित्सालयों, आई.टी पार्कों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। हमारे नवयुवक-नवयुवतियाँ न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में अपनी प्रतिभा से भारत का लोहा मनवा रहे हैं। कंप्यूटर और इन्टरनेट की इस नई सदी के साथ शिक्षा के स्तर में असाधारण बदलाव आए हैं।

मित्रों,

इस ऐतिहासिक अवसर पर शस्त्रबलों द्वारा दी गई सेवाओं का उल्लेख विशेष रूप से आवश्यक है। राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। हमारे शस्त्रकर्मी, भक्ति की सर्वोच्च परंपरा, पूर्ण समर्पण और वीरता से राष्ट्र की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखने में सक्षम रहे हैं। आज के सुरक्षा परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए, हमारे शस्त्रबलों को चाहिए कि वे आंतरिक और बाह्य क्षेत्र में अपने कत्र्तव्य और जिम्मेदारियों का पालन और भी अधिक समर्पण और विशेषज्ञता से करें। राष्ट्रीय सुरक्षा बल क्षेत्रीय स्वतंत्रता, एकता, सम्मान और स्वाभिमान की सुरक्षा करने में सक्षम रहेंगे, इसमें मुझे जरा भी संदेह नहीं है। हम जानते हैं कि सेवामुक्त सुरक्षा कर्मियों को हमारे विशेष सहयोग की जरूरत है, इसलिए हमें उनकी सहायता के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।

मित्रों,

मैं समझती हूँ कि राष्ट्र की प्रगति में सिविल सेवकों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इन नए प्रगतिशील युग में हमें चाहिए कि हमारी प्रशासनिक व्यवस्था हर चुनौति का सामना सकारात्मक व दक्षतापूर्वक कर पाए। हमारे सिविल सेवकों को चाहिए कि वे जन-जन के बीच जाकर उनकी समस्याओं के जड़ को समझें। तद्नुसार योजनाएँ बनाएँ। यह समय की मांग है कि एक नई उपाय योजना की तैयारी की जाए जिससे सरकार सभी नागरिकों को बेहतर सेवाएं प्रदान कर सके। साथ ही राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और जनहित उद्देश्यों का भी पालन हो सके।

जहाँ तक गोवा राज्य की सुरक्षा व्यवस्था का प्रश्न है, मुझे यह कहते हुए प्रसन्नता हो रही है कि गोवा पुलिस प्रशासन नागरिकों की सुरक्षा में तत्पर और मुस्तैद हैं। इनकी सतर्कता और मुस्तैदी का ही परिणाम है कि हम आतंकवादी हमलों से बचे हैं। मैं गोवावासियों से भी अपेक्षा रखती हूँ कि वे पुलिस और सुरक्षा एजंेसियों की सहायता करें।

वैज्ञानिक उपलब्धियों से आज विश्व बहुत छोटा हो गया है। हमारे आसपास दिखता है। हमारे नई पीढ़ी को विश्व के ज्ञान प्राप्ति में विशेष रूचि लेनी चाहिए। जिससे भारत ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम्’’ का सनातन लक्ष्य प्राप्त कर सके। मेरा दृढ़ विश्वास है कि शिक्षा में जीवन मूल्यों की शिक्षा की व्यवस्था होगी। जीवन की शिक्षा तभी पूर्ण मानी जाएगी। हमारे मार्गदर्शक महात्मा गाँधी जी ने हमें जो सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया था, हमें इसे व्यक्तिगत, पारिवारिक और राष्ट्रीय जीवन का पाथेय बनाकर आगे बढ़ते रहना चाहिए।

मित्रों,

आज इस अवसर पर हमें संकल्प करना चाहिए कि हम अपनी सभ्यता को मानवीय गुणों से समृद्ध करेंगें, साथ ही एकता, सत्यता, न्याय, अहिंसा, सहयोग और स्वच्छता जैसे जीवन मूल्यों से भर देंगें। पूरे विश्व में अपनी मातृभूमि को गौरवान्वित करना है।

सभी नागरिकों में एकता निर्माण पर जोर देना आवश्यक है। क्योंकि संविधान में दर्ज नागरिकों से आशाओं में एकजुटता ही सबसे अधिक महत्वपूर्ण विन्दू है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि हमारा देश विकास के लिए अपने हर अधूरे उद्देश्य को पूरा करने में अवश्य कामयाब रहेगा। हमंे यह नहीं भूलना चाहिए कि आज भी हमारे देश में ऐसे लोग हैं जिनके सर पर छत नहीं है, और वे अस्वच्छ स्थानों पर अपना जीवन व्यतीत करने को मजबूर हैं, बिमारियों और कुपोषण से ग्रस्त हैं, अभी भी बहुत से लोग शिक्षा से वंचित हैं। सरकार द्वारा लाई गई योजनाओं और नीतियों का यही उद्देश्य है कि इन सभी समस्याओं का जल्द से जल्द निवारण हो।

देवियों और सज्जनों,

जैसा कि आप सभी लोग जानते हैं हमारा देश वित्तीय घोटालों, अपराधों, कुनबा परस्ती, अवैधता, अनियमितता जैसी अवैध प्रथाओं से भी ग्रस्त है। गण और तंत्र दोनों के सहयोग से इन बुराइयों से मुक्ति पानी है।

देवियों और सज्जनों,

अपने राज्य गोवा के बारे में मुझे बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि गोवा ने आप सबके सहयोग से हर क्षेत्र में असाधारण उन्नति प्राप्त की है। गोवा देश के अन्य भागों की तुलना में 14 साल बाद औपनिवेशिक शासन से मुक्त किया गया था, फिर भी विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धियाँ प्राप्त करते हुए स्वयं को एक शांतिपूर्ण एवं विकासोन्मुख राज्य के रूप में प्रतिष्ठित कर पाया है।

देवियों और सज्जनों,

गोवा ने एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में जगह बना ली है। यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के लिए भी सुविधाजनक और लोकप्रिय स्थल बन गया है। पिछले एक साल में राष्ट्रीय कार्यक्रमों के साथ-साथ गोवा बहुत से अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों जैसे डिफेन्स एक्सपो, ब्रिक्स सम्मिट और इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का आयोजन कर चूका है। आईए! आज इस सुअवसर पर एक प्रण लें कि जिन अच्छी परम्पराओं, सोच के खुले दायरे और शांति के लिए यह राज्य जाना जाता है, उसे हम संजोकर रखेंगे।

मित्रों,

आज इस आनंदोत्सव पर मैं सभी नागरिकों का बहुत बहुत धन्यवाद करना चाहती हूँ कि जो कार्य स्वयं माननीय प्रधानमंत्री जी ने मुझे स्वच्छ भारत अभियान कि ब्रैंड एम्बेसडर बनाकर सौंपा था, उसे सकारात्मक रूप से सक्रियता दिखाने में आप सभी का सराहनीय योगदान रहा है।

देवियों और सज्जनों,

यह गोवा के लिए गौरव की बात है कि इस राज्य ने लोकतंत्र के सभी सिद्धान्तों को बरकरार रखा और राष्ट्रीय एकता और उन्नति के लिए विशेष योगदान दिया है। मुझे एहसास है कि गोवा के लोगों को लोकतान्त्रिक जीवन शैली में पूर्ण विश्वास है। विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के लिए चुनाव शीघ्र ही आयोजित होने जा रहे हैं, और मैं जानती हूँ कि लोग इस लोकतान्त्रिक प्रक्रिया में उत्साह के साथ भाग लेते हुए नजर आएंगे। मेरी उत्कृष्ट इच्छा और गोवा का इतिहास देखते हुए अपेक्षा है कि आगामी चुनाव लोकतांत्रिक परंपराओं से शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से पूर्ण होगा।

प्रिय गोवावासियों,

आप सब को स्मरण दिलाती हूँ कि भारतीय संस्कृति का मूलाधार “सर्वे भवन्तु सुखीनः ही संविधान का आधार मंत्र है। हम सभी को इस मंत्र को धारण करना है। आज इस ऐतिहासिक दिन को हम त्योहार के रूप में मनाएं। आप सभी को पुनः गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देती हूँ।

जय गोवा, जय हिन्द।