Independence Day 2016 Speech

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर

महामहिम राज्यपाल डॉ. मृदुला सिन्हा का संदेश

प्रिय बहनों, भाइयों, युवाओं और बच्चों!

समस्त गोवावासियों को 69वीं स्वतंत्रता दिवस की बधाई। आज सारा देश यह दिवस एक उत्सव की तरह मना रहा है। 1947 में हमें आजादी मिली। वर्षों-वर्षों तक हमारे नेताओं और असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी जान की बाजी लगाकर इसे हासिल किया।

इस ऐतिहासिक अवसर पर आइए हम अपने देश पर अपनी जान तक न्यौछावर करने वाले शहीदों एवं उन महान स्त्रियों एवं पुरुषों को श्रद्धांजलि दें, जिन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं अन्य देशभक्त नेताओं के आवाहण पर प्राणों की बाजी लगाकर भारत माता को ब्रिटिश हुकूमत से आजाद कराया था। उनसे प्रेरणा लेकर एक भारतीय नागरिक होने के नाते हम सब का यह परम नैतिक प्रयास होना चाहिए कि हम स्वार्थ की भावना से ऊपर उठकर देश के लिए चैतरफा कठिन परिश्रम करें।

पिछले 69 वर्षों में देश ने जीवन के हर क्षेत्र में विकास किया है। हमारी स्वतंत्रता अक्षुण्य रखने के लिए आज भी सीमा पर हमारे लाखों जवान जान की बाजी लगाए खड़े हैं। उनके अंदर देशभक्ति के भाव भरने में हमारे देशभक्त दूरदृष्टि वाले नेताओं से लेकर 130 करोड़ जनता आगे आ जाती है। जब-जब देश पर हमारे पड़ोसियों द्वारा हमले हुए हम सब एकजुट होकर जवानों के हौसले बुलंद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, तो दूसरी ओर देश की ऐसी कठिन घड़ियों में जनता के बीच एकता बरकरार रखने में सफल रहे। लड़ाइयों के समय सरकार के खजाने रुपयों और सोना-चाँदी से भरने में पुरुषों और सुहागिनों ने अपूर्व त्याग दिखाया। अंगुलियों में मात्र एक अंगूठी और गले में एक चेन रखने और पहनने वाली महिलाओं ने भी अपना सोना देश हित में दान कर दिया।

इसी देशभक्ति भाव के कारण हम समय पर आर्थिक लड़ाइयाँ भी जीतने में कामयाब रहे हैं। यद्यपि आज भी अशिक्षा, बीमारियाँ, भूखमरी तथा अन्य पिछड़ेपन के निशान मिलते हैं, फिर भी 1947 के बाद देश की विकास यात्रा अविकसित, विकासशील से अब विकसित देश बनने के कगार पर है।

देवियों और सज्जनों!

हम सब जानते हैं कि स्वतंत्र भारत में हमारे देश ने विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धियां हासिल की है, जिसका श्रेय हमारे उन समस्त देशवासियों को जाता है, जिन्होंने देश के संपूर्ण विकास में अपना सहयोग और अवदान निवेदित किया है। देश बहुभाषिक, बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक तथा बहुजातीय होने के बावजूद हमने अपनी एकता और अखंडता को संरक्षित रखी है।

हमारे उद्योगपतियों ने सूई से लेकर हवाई जहाज तक बनाने में देश को अन्य विकसित देशों के साथ खड़ा किया है। कृषि क्षेत्र की उपलब्धियाँ अविश्वसनीय लगती हैं। एक-दो अन्न की कमी को छोड़कर हमारे किसानों ने अन्न और फल उपजा कर देश को आत्मनिर्भर बना दिया है। वस्त्र के मामले में हम आत्मनिर्भर हैं ही। रोटी, कपड़ा और मकान की पूर्ति बड़े पैमाने पर हो ही रही है। तमाम इलेक्ट्रानिक उपकरणों और बिजली उत्पादन में भी देश काफी आगे ब मित्रों!

अपने राज्य गोवा में भी विकास दर काफी ऊँचा उठा है। गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों की संख्या न के बराबर है। शिक्षा का प्रतिशत ब स्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर पर हम गोवावासियों को अपनी शानदार उपलब्धियों पर गर्व करना चाहिए, जिन्हें स्वतंत्रता की प्राप्ति के उपरांत कठिन मेहनत से पाया है। राज्य ने राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक आदि क्षेत्रों में अप्रत्याशित उन्नति की है। हमारी सरकार गोवा राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में अभिनव परिवर्तन लाने के लिए वचनबद्ध है। राज्य सरकार शिक्षा, कृषि, पर्यटन उद्योग, जल-आपूर्ति, महिला कल्याण आदि दिशाओं में प्रगति तथा अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों तथा पिछड़े वर्ग की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे उनके जीवन-स्तर में बेहतर सुधार संभव हो सके। शिक्षा के क्षेत्र में वर्तमान सरकार ने गोवा को अंतरराष्ट्रीय स्तर का केन्द्र बनाने का सपना संजोया है। और वे इस कार्य पर पूर्ण करने के लिए पूर्णरूपेण संकल्पित हैं।

देश के कोने-कोने से अन्य देशों के लिए अनेकानेक वस्तुओं का निर्यात हो रहा है। पुरातन देश सदा से उत्पादों के साथ अपने विचार, दर्शन और सिद्धांत भी निर्यात करता रहा है। स्वतंत्रता के पश्चात सारा विश्व हमारी जीवन निधियों योग, अहिंसा, आयुर्वेद को जीवन अमृत समझकर अपनाने में अग्रसर हैं। अहिंसा और योग को अपनाया, आशा की जाती है कि अब आगे आयुर्वेद को भी विश्व मान्यता मिल जाएगी। मुझे विश्वास है कि हमारे नौजवानों ने पश्चिम के देशों में जाकर कड़ी मेहनत और मेधा के बल पर देश की पहचान बनाई है। उनकी उपलब्धियों में वर्तमान प्रधानमंत्री ने विदेशों में स्वयं घूम-घूम कर अप्रवासी भारतीयों एवं देश का मान और उत्साह ब

देवियों और सज्जनों!

मैं इस बात को विशेष रूप से रेखांकित करना चाहती हूँ कि हमारी सेना ने राष्ट्रीय स्वातंत्र्य और सम्मान की रक्षा में अहम भूमिका निभाई है, साथ ही उन्होंने सशक्त, आत्मनिर्भर और आत्मविश्वास से परिपूर्ण देश के निर्माण में अपना अतुल्य योगदान दिया है। परिणामस्वरूप हम सामाजिक, आर्थिक विकास और समृद्धि की दिशा में अग्रसर रहे हैं, हमारी तीनों सशक्त सेनाओं ने जहां सीमा की सुरक्षा का उत्तरदायित्व पूरी कुशलता के साथ निभाया, वहीं बड़ी तत्परता के साथ प्राकृतिक आपदाओं के प्रकोप की स्थिति में जनता की हिफाजत भी की। चाहे बा

दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत पूरे विश्व में विकास के लिए उदाहरण बन रहा है। हमारे देश में संपन्न चुनावों की विधियों की प्रशंसा होती है। पिछले 69 वर्षों में कई बार ऐसी आशंका हुई कि लोकतंत्रीय व्यवस्था समाप्त न हो जाए। ऐसा नहीं हुआ। उल्टा लोकतंत्र में आई खामियों को लोक ने खंगाला, पुनः लोकतंत्र में विश्वास पैदा किया।

लोकतंत्र के चार स्तंभ माने गए हैं। मेरी समझ से स्वैच्छिक क्षेत्र इसका पाँचवाँ स्तँभ है। यही पाँचवाँ स्तँभ ‘लोक है। लोकतंत्र में लोक की ही भूमिका सर्वोपरि है। उनपर विशेष ध्यान देने की जरूरत भी है। क्योंकि लोकतंत्र, लोक द्वारा, लोक के लिए और लोक का है।

मित्रों,

मैं आपको स्मरण दिलाना चाहती हूँ कि माननीय प्रधानमंत्री जी ने 2 अक्तूबर, 2014 को मुझे ‘स्वच्छ भारत अभियान का नेतृत्व सौंपा है। विगत 23 महीनों से मैं इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य के प्रति अपना सारा ध्यान एकत्रित कर रही हूं। यह कहते हुए मुझे प्रसन्नता है कि गोवा के लोगों ने इस संबंध में अपना सहयोग दिया। मैंने गोवा के 5 शहरों को साफ-सफाई के मॉडल शहरों के रूप में अपनाया है तथा 2016 के अंत में स्वच्छतम शहर को एक लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की है। 2016 के अंत तक हमने गोवा राज्य को देश का सबसे उत्तम स्वछ राज्य बनाने का संकल्प लिया है। इस संबंध में मैंने समाज के विभिन्न वर्गों तथा नगर निकायों के साथ अनेक बैठकें की। हालांकि इस उद्देश्य के प्रति लोगों की मानसिकता में बड़ा परिवर्तन आया है फिर भी अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। विभिन्न अवसरों पर मेरे ध्यान में लाई गई एक समस्या है कि लोग बिना सोचे समझे सार्वजनिक स्थानों पर मिश्रित कचरे का मेरा एक बार फिर सभी लोगों से अपील है कि वे इस बात पर गंभीरता पूर्वक ध्यान दें तथा स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने में अपना सहयोग व मदद दें।

मित्रों!

मुझे यह बताते हुए बहुत हर्ष की अनुभूति हो रही है कि हमारा देश अपनी गौरवपूर्ण परंपरा का निर्वाह करते हुए दूरदर्शितापूर्वक दूसरे देशों के साथ अच्छे और मित्रतापूर्ण संबंध बना रहा है। हम अंतर्राष्ट्रीय शांति, सहयोग और सहअस्तित्व को बनाए रखने के लिए दृ

देश के विकसित राष्ट्र का स्थान प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि हमारी परिवार व्यवस्था सुदृ आइए! इन्हीं उपरोक्त तत्वों को अपना पाथेय बनाने के लिए इस पावन अवसर पर तीन वचन लें-

(1) हम अपने लोकतंत्र को बल प्रदान करने के लिए प्रतिदिन एक घंटे का समाजहित कार्य करेंगे।

(2) हम जिस किसी भी स्तंभ (विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका, प्रेस और स्वैच्छिक क्षेत्र) से जुड़े हों, उसे मजबूत करते हुए अन्य चार स्तंभों को भी मजबूत बनाने में मदद करेंगे।

(3) अपने घर-गली-मुहल्ले में साफ-सफाई में मनोयोग और दूसरों के सहयोग से जुट जाएंगे एवं सभी संप्रदायों, जातियों और वर्गों के बीच सौहार्द बनाए रखने की कोशिश करेंगे।

विविधता में एकता हमारी विशेषता रही है। इसे कायम रखना और अपनी अगली पी जय भारत, स्वतंत्र भारत - जय गोवा, स्वतंत्र गोवा।