Goa Statehood Day 2017 Speech

माननीय राज्यपाल का संदेश

गोवा राज्य गठन दिवस - 30 मई, 2017

मेरे प्रिय नागरिकों:

30 मई, गोवा राज्य गठन दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर मैं आप सभी को हार्दिक बधाईयाँ और शुभकामनाएँ देती हूँ।

यह दिन गोवा के राजनीतिक इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण मील का पत्थर रहा है। 1961 में औपनिवेशिक शासन से मुक्त होने पर गोवा के स्वतंत्र राज्य बनने अथवा अन्य पड़ोसी राज्यों का हिस्सा बन जाने पर विवाद खड़ा हुआ। 1967 में एक रायसुमारी के द्वारा यह निश्चय किया गया कि गोवा को एक अलग केन्द्र शासित राज्य बनाया जाएगा। ऐसा ही कार्यान्वयन हुआ। 30 मई, 1987 को भारतीय संघ में गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ। यह गोवावासियों के लिए गर्व और अत्यंत प्रसन्नता का दिन है। राज्य को मिली पिछली उपलब्धियों को आगे बढ़ाने, वर्तमान स्थिति पर सोच-विचार करने, भविष्य का पूर्वानुमान लगाते हुए, उस दिशा में कार्यरत होने का यह समय है, जिन प्रयासों के चलते गोवा को यह महत्त्वपूर्ण पहचान प्राप्त हो सकी है। उन सभी प्रयासों और उपलब्धियों के प्रति स्वयं को पुनः समर्पित और कार्यशील करने के लिए इस तिथि को एक सुअवसर के रूप में भी देखा जा सकता है।

इस राज्य के राज्यपाल पद को ग्रहण करने के बाद, राज्य गठन दिवस पर मैं तीसरी बार गोवावासियों को बधाईयाँ दे रही हूँ। पिछले 33 महीनों से गोवा में रहते हुए मैंने देखा है कि यहाँ राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक स्तर पर काफी विकास हो रहा है, जिससे लोगों की विकासमूलक आकांक्षाएँ पूर्णता की ओर अग्रसर है। हमारे संविधान की संघीय संरचना को ध्यान में रखते हुए एक पूर्ण राज्य के रूप में गोवा ने संस्थापित राजनीतिक सहयोग और सामूहिक सह-अस्तित्व को बरकरार रखा है। गोवा ने राष्ट्रीय विकास में राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। गोवा राज्य को अपनी मूलभूत जरूरतों और आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए केन्द्र से अनुकूल मान्यता और सहयोग प्राप्त होता रहा है। भारतीय संघ के एक अभिन्न अंग के रूप में गोवा, हमारी प्रिय मातृभूमि के संदर्भ में लोकतांत्रिक और संवैधानिक योजनाओं के अनुरूप राष्ट्रीय एकता, अखंडता और क्षेत्रीय संप्रभुता को प्राथमिकता देते हुए, राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और स्थानीय जरूरतों के संबंध में अधिक विकास की दिशा में अग्रसर हो रहा है यह हमारे लिए संतुष्टी की बात है।

राजनीतिक, सामाजिक तथा आर्थिक स्तर पर विकास को बरकरार रखने में गोवा को सफलता हासिल हुई है, इसका श्रेय मैं गोवावासियों को देना चाहूँगी। यहाँ के लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए सरकार की ओर से हर संभव प्रयास और पहल की जा रही है। समाज के कमजोर, पिछड़े और महिलाओं सहित अन्य सभी वर्गों हेतु जनकल्याण और बुनियादी ढ़ाँचे के विकास से संबंधित कई नई योजनाएँ लागू हो रही हैं। केन्द्र सरकार द्वारा लागू की गई सभी योजनाएँ गोवा राज्य में सुचारू रूप से कार्यान्वित हो रही है।

मुझे यह कहते हुए बड़ी प्रसन्नता हो रही है कि राज्य में मुख्यमंत्री श्री मनोहर पार्रीकर के नेतृत्व में बनी नई सरकार विभिन्न क्षेत्रों में सर्वोच्च लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु तथा गोवा को एक विकसित राज्य बनाने हेतु हर संभव संकल्पबद्ध एवं सक्रिय है।

गोवा, शांति और आतिथ्य भाव के लिए जाना जाता है। गोवा ने एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में जगह बना ली है। यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के लिए भी सुविधाजनक और लोकप्रिय स्थल बन गया है। हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हमारे राज्य में आने वाले आगंतुकों के साथ अपने पारंपरिक संस्कार को दर्शाते हुए सहयोग, सम्मान और आतिथ्य भाव से व्यवहार करें। जिन अच्छी परम्पराओं, सोच के खुले दायरे और शांति के लिए यह राज्य जाना जाता है, उसे हम संजोकर रखें।

गोवा राज्य विभिन्न क्षेत्रों में विकास प्राप्त करने की क्षमता रखता है। यहाँ के विद्यालयों तथा उच्च शैक्षिक संस्थाओं में शिक्षा में और अधिक गुणवत्ता लाने के लिए सरकार तथा निजी शिक्षण संस्थाओं द्वारा मिल-जुलकर प्रयास हो रहे हैं। युवा शक्ति को नई दिशा देने के क्रम में उनके गौरवशाली परम्पराओं का स्मरण दिलाते रहना होगा। उनकी शक्ति को परिवार, समाज तथा राष्ट्र के चतुर्दिक विकास में लगाने के प्रयास करने होंगे। ताकि भारत को पुनः विश्व गुरु बनाने का राष्ट्रीय संकल्प पूरा हो।

महिलाओं और बच्चों को पूरी सुरक्षा देने की अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करने में समाज को सरकार से पीछे नहीं रहना है। महिलाएँ और बच्चे हमेशा से राष्ट्र का गौरव रहे हैं। उन्हें एक सम्मानजनक जीवन का आनंद लेने का अवसर देने की दिशा में हमें अपना ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। उन्हें हमारी सहानुभूति, समझ, प्रेम, सुरक्षा व्यवस्था और सम्मान की आवश्यकता है।

यह हम सभी गोवावासियों के लिए हर्ष का विषय है कि गोवा विश्वविद्यालय के हाल ही में संपन्न हुए दीक्षांत समारोह में भारत के माननीय राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी जी ने मुख्य अतिथि के रूप में पधार कर अपने आशीर्वचन की फुहार से गोवा के युवा मानस को सींचा है। उनके आशीर्वचन से मात्र उपस्थितजन ही नहीं, अपितु समस्त गोवावासी और शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत देश के शिक्षाविद् और शिक्षार्थी गण भी लाभान्वित हुए तथा वह पल समस्त गोवावासियों के लिए ऐतिहासिक क्षण बन गया।

गोवा अपनी सांस्कृतिक धरोहर संरचना के संरक्षण की परंपरा को बनाए रखने में कामयाब रहा है। हाल ही में किसी विद्वान व्यक्ति ने कहा है- ‘‘गोवा भारत वर्ष की सांस्कृतिक राजधानी है।’’ गोवा ही एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ गोवा नागरिक संहिता पूर्ण रूप से लागू और सफल रहा है। इस पर मैंने अध्ययन किया और इस निष्कर्ष पर आई कि ‘गोवा नागरिक संहिता का प्रयास सर्वथा धर्मनिरपेक्ष है और साथ ही समान नागरिक संहिता के तहत महिलाओं का एकीकरण ही राष्ट्रीय एकता और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है।

राजभवन द्वारा वर्ष में तीन बार मनाए जाने वाले ‘एट होम कार्यक्रम के अतिथि सूची में राज्य के दिव्यांगों, वृद्ध व्यक्तियों, अनाथ बच्चे, प्रतिभाशाली बच्चे, उपलब्धि प्राप्त शिक्षकों, अलग-अलग खेलों के पुरस्कार प्राप्त विजेताओं, कला-संगीत-चित्रकारी-अभिनय-साहित्य क्षेत्र के प्रख्यात हस्तियों, विभिन्न सामाजिक क्षेत्र की प्रख्यात महिलाओं, किसी भी क्षेत्र में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कार प्राप्त की हुई महिलाओं को आमंत्रित किया जाने लगा है। गोवा में यह एक नई पहल है।

स्वच्छ भारत अभियान को कार्यान्वित करने हेतु माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीजी ने मुझे 2 अक्तूबर, 2014 को मनोनीत किया था। इस कार्य के प्रति मैं लगातार प्रयत्नशील और कटिबद्ध हूँ। और समय पर आप सबों को स्मरण और अवगत कराती रहती हूँ। पुनः इस अवसर पर मैं अपने साथी नागरिकों को याद दिलाना चाहती हूँ कि इस अभियान के तहत् अपने राज्य को साफ-सुथरा रखने हेतु हमें लगातार प्रयत्नशील रहना होगा, कार्य की गति बढ़ानी होगी ताकि हमारा राज्य गंदगी और अवांछित पदार्थों से बचा रहे। यह हमारी संस्कृति का सवाल है। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु हमें सामूहिक रूप से कार्य करना होगा तथा गोवा को भारत का सर्वोच्च साफ-सुथरा राज्य के रूप में पहचान दिलानी होगी। हमें अपनी सभी गतिविधियों में स्वच्छता की सोच और व्यवहार अपनाना होगा। इस महान सामाजिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए हर नागरिक की भूमिका और योगदान महत्त्वपूर्ण है।

मैं एक बार फिर गोवा राज्य गठन दिवस के शुभ अवसर पर सभी गोवावासियों को बधाईयाँ देती हूँ।

जय-जय गोवा, जय-जय भारत।

जय हिन्द।